Best Orthopedic & Gynae Hospital In Raipur

sadbhavna_logo

“आपको जोड़ प्रत्यारोपन की ज़रूरत हैं!!!”

Joint surgery in Raipur

येसुन कर बहुत से लोग सहम जातेंहैं, घबरा जातें हैं।
इस डर का कारण हैअज्ञानता । ज्ञान,समझ, और जानकारी मानुष को भय-मुक्त करती है।
येलेख जोड़ प्रत्यारोपन केि वषय में जानकारी देने का एक प्रयास है।
घुटनेकी संग्राचना/ बनावट
घुटनेका जोड़ जाँघ की हड्डी (femur) और पैर की हड्डी ( tibia) के बींच होता हैं| दोनों हड्डियाँआपस में ना रगड़ें
इसी िलयें दोनों के ऊपर एक मोटी िचकनी परत होती है। येिचकनाई युक्त परत, िजसे कार्टििलज( cartilage)
कहते है, घुटने की जीवन रेखा होती हैं। येना िसर्फ़ कैल्सीयम रिहत होतीं है, इस में दर्दकी कोिशकाओं केना होने
की वजह से दर्दका एहसास नहीं होता। इसको लोग आम भाषा में जोड़ की गद्दी, िचकनी हड्डी, गैप, या कभी कभी
oil या तेल भी कहतेहैं।
ऑस्टीओआर्थ्रायटिस क्या है
ऑस्टीओआर्थ्रायटिस दो तरह सेहोता है, एक जो उम्र की वजह सेहोता है , जो कि ज़्यादातर पाया जाता है, और
दूसर पुरानी चोट या कोई जोड़ की पुरानी बीमारी सेहोता है।
उम्र केसाथ, िचकनी हड्डी या कॉर्टििलज धीरे-धीरेिघस जाती है, घुटेनेकी हड्डियाँपास आ कर आपस नेरगड़
खाती है। शुरू मेंकभी कभी दर्दहोता हैफिर काम हो जाता है, बारिश केपहलेऔर ठंड मेंयेदर्दआमतौर पेबड़
जातेंहैं,
फिर जब कार्टििलज काफ़ी काम हो जाता हैतो दर्दहमेशा रहनेलगता है। एक्स रेमेंजोड़ का गैप या कार्टििलज
िधकना काम हो जाता हैं। कार्टििलज इस इस कमी को ही ऑस्टीओआर्थ्रायटिस कहतेहै।
जोड़ प्रत्यारोपन क्यों किया जाता हैऔर क्या होता हैं
जोड़ प्रत्यारोपन मूल तौर पर तीन करणों सेकिया जाता है१ दर्द, २ िडफ़ॉर्मिटी, और ३ इन्स्टिबिलटी
ओस्टीओआर्थ्रायटिस के advanced स्टेज मेंरोिगयों को दर्दहमेशा रहनेलगता है, पैर अंदर की तरफ़ मुड़ जातेंहै
। उसकी वजह सेउनका जीवन प्रभािवत होनेलगता हैं। दर्दया तो उन्हेंघर मेंही क़ैद कर देता हैया जीवन दर्दकी
दवा पर ही चलता है।एक व्यक्ति िजसनेपूरी ज़िंदगी अपनेदम पेिबताई थी अब वही अपनो पर िनर्भर हो जाता
है। जोड़ प्रितरोपण रोगी को ना िसर्फ़ दर्दमुक्त करता है , साथ मेंएक आत्मिनर्भर ज़िंदगी जीनेका मार्गखोलता हैं
जब जोड़ प्यतारोपन एक ऑपरेशन हैिजसमेंजोड़ केिघसेंहुएँऔर ख़राब कार्टििलज को हटा कर नए कृत्रिम
कार्टििलज सेबदल दिया जाता है ,जो कि धातुऔर पॉलेमर सेबनतेहैं।असल मेंजोड़ प्रत्यारोप , जोड़ नहीं
कॉर्टििलज प्रत्यारोपन होता है।
येंएक बहुत ही safe ऑपरेशन है, िजसेिबना बेहोशी के वल पैर को सुन कर केकिया जाता है। और क्योंकि
जेनरल अनाएथेसीया की ज़रूरत नहीं पड़ती, ज़्यादा उम्र केलोग भी येऑपरेशन करा सकतेहैं। आम तौर पर ५०-
८० की उम्र केलोगों को इसकी ज़रूरत पड़ती हैं।
ऑपरेशन केअगलेही दिन सेमरीज़ चलनेलागतेंहैं, और चार सेपाँच दिनों मेंअपनेघर जा सकतेहैं।
किसेकरना चािहए और कब करना चािहए
जब घुटनेका दर्दचलनेपर हमेशा रहनेलगे, और इस दर्दकी वजह सेव्यक्ति अपनी दिनचर्यापूरी करनेमें
असमर्थमहसूस करनेलगे, और x-ray मेंकार्टििलज की कमी साफ़ दिखेंतब हम कहेंगेकी ऑपरेशन का सही वक़्त
आ गया। कभी कभी दर्दकम हो लेकिन घुटनो केटेढ़ेपन की वजह सेव्यक्ति अपनेकाम स्वयंकरनेमेंअसमर्थहो
जाए तो ऑपरेशन सेफ़ायदा पहुँचाया जा सकता है।
ऑपरेशन केिलए सबसेअच्छी उम्र ५० से८० वर्षहोती हैं, लेकिन ज़रूरत पड़नेपर कम उम्र मेंभी येकरतार
िसद्ध हुआ हैऔर medically fit हो तो ९०-९५ साल केलोगों का भी ऑपरेशन सम्भव है।
कहाँकरना
आज टेक्नालोजी का दौर हैं, बीस-पचीस साल पहलें ये टेक्नालोजी िवदेशों में सी सम्भव थीं। फिर १५-१६ साल पहले ये भारत
के महानगरों में पहुँची, और येऑपरेशन के वल महानगरों मेंही संभव था। आज टेक्नालोजी का प्रवाह एसा है की नयीं चीज़ें
िवदेशों में बनतेही भारत के छोटें शहरों में भी  उपलब्ध हो ज़ाती है। ठीक इसी तरह जोड़ प्रत्यारोपन की टेक्नालोजी अब
महानगरों केअलवा बाक़ी शहरों में भी पहुँच चुकी हैं।
लोग अब इन शहरों में धक्के ख़ानेकी बजाय अपनेही शहर में इलाज करा रहें है।
महानगरों सेअब बड़े हॉस्पिटल्ज़ और ग्रूप अब इन शहरों पर ताक लगाएँ हैं, और धीरे-धीरे इनकी तरफ़ रूख कर रहें है।

written by- Dr. Ankur Gupta.  
(MBBS, MS, M.Ch – Orthopedics)
Sadbhavana Hospital,Raipur.